सावन शिव पूजा: सावन में इन मंत्रों से करें देवदेव महादेव की पूजा, गोधि शिव के 108 नाम - Hindi News; Latest Hindi News, Breaking Hindi News Live, Hindi Samachar (हिंदी समाचार), Hindi News Paper Today - Ujjwalprakash Latest News
सावन शिव पूजा: सावन में इन मंत्रों से करें देवदेव महादेव की पूजा, गोधि शिव के 108 नाम

सावन शिव पूजा: सावन में इन मंत्रों से करें देवदेव महादेव की पूजा, गोधि शिव के 108 नाम


सावन शिव पूजा मंत्र: का आ माह ்் ்் ்் ்்் ்ி்் ்்ி்் ்்்ி்்ி்்ி் ऐसे में 24 नवंबर 2021 सुबह 08:06 बजे तक पूर्णावरण के बाद. ट्विंकल के साथ शिव के पवित्र ज्ञान सायवन की जानकारी।

इस बार के जानकारों के बारे में जानकारों का कहना है कि सावन 24 जुलाई से ही हो। इस बार सावन 25 जुलाई से चालू होने के कारण तारीख कुछ समय के लिए चालू होगी। ट्विन सावन का कन्फ़्यूज़र्वणी पूर्णिमा के दिन या 22 अगस्त को।

चूकिं 20 नवंबर से सुप्रभात, और चौ. ऐसे में हर भक्त इस समय शिव का आशीर्वाद प्रकट होता है।

जरुर पढ़ा होगा- इस तरह पूजा, आशीर्वाद 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

पहला सावन सोमवार

जब तक सुनिश्चित किया जाए, तब तक सुनिश्चित करें। ऐसे में आज हम करेंगें।

मंत्र के अनुसार, मंत्र का लिखावट भी पूर्ण होगा।

गो शिव के मंत्र :

मनोभ्रंश फल के लिए…

नागेंद्रचरणाय त्रिलोकनय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिग्ंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:
सलिल चंदनमहिदित बैठक में नंदीश्वर प्रथनाथेश्वर
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे मरा नम: शिवाय:
शिव गौरी वदनाबजवंद सूर्य दक्षध्वरनासकाय:
श्री नीलकंठा वृद्घजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:
अवंतिकायं विहितावतारं मुक्तिप्राप्ति।
एकमृत्यो: परिशोधनं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।।

स्वास्थ्य के लिए मंत्र…

सौराष्ट्रदेश विशदेतिरम्ये ज्योतिर्मयं चंद्रकलांसंम्।
भक्ताय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्येद्य ।।।
कावेरिकानर्मद्यो: पवित्रे समागममे संतारणाय।
शासन मान्धातृपुरे वसंतमोनकारमीशं शिवमेकमीडे।।।

जरुर पढ़ा होगा– चातुर्मास शुरू : शिवपूर्ष के लिए इन चेष्टा में ये विशेष हैं!

कहुरमास पर शिव

पूजा के शिव जी को स्नान दान का मंत्र…
ॐ वरुणस्योत्तमंसि वरुणस्य संभ्रम सर्जनिस्थो।
वरुणस्य ऋतसद्न्यास वरुण वरुणस्य ऋतसडनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद ।।

गो शिव यज्ञोपवीत दान का मंत्र…
ब्रह्म ज्ज्ञानप्रथम पुरस्ताद्वीसमतः सुरुचोवेन आवः।
स बुध्न्या उपमा अस्य विष्ठाः सतीश योमस्तश्च विवः ।।

भोलेनाथ कोघ्र दान का मंत्र…
ॐ नमः स्वाभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवय च रुद्राय च नमः।
शर्वाय चपशुपतये च नमो नीलग्रीवा च शितिकण्ठाय च ।।

अर्धनारीश्वर भोलेनाथ को सूर्य नमस्कार का मंत्र…
ॐ नमः कपार्दिने च व्युप्त केशय च नमः सहस्त्राक्षय च शतधन्वने च।
नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमय चेषुमते च ।।

गोशिव को पुष्पांजलि अर्पित करने का मंत्र…

ॐ नमः पार्याय चावर्याय च नम: प्रत्यरणाय चद्वितीय च।
नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च नमः शशपय च फेन्याय च ।।

भोलेनाथ कोनैवेद्य अर्पण का मंत्र…
ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय कचकरजाय च।
नमो मध्यम कड़कल्भय च नमो जघन्याय बुधन्याय च ।।

जरुर पढ़ा होगा- एक दिन के लिए बनाए रखने के लिए प्राकृतिक जल पर टिकाएं लंघन विष्णु ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️

विष्णु मंदिर

गोशिव को ताम्बूल पूगीफल दान का मंत्र…
इमा रुद्राय तवसे कपार्दिने क्षेद्वीराय प्रभ्रमहे मतीः ।
यशा शमद द्विपदे चतुष्पदे यश विश्वं पुष्टं ग्रामे अस्थामन्ननातुरम् ।।।

भोलेनाथ को सुगन्धित तेल दान का मंत्र…
ॐ नमः कपार्दिने च व्युप्त केशय च नमः सहस्त्राक्षय च शतधन्वने च।
नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमय चेषुमते च ।।।

भोलेनाथ को दीप दर्शन का मंत्र…

ॐ नमः आरा ध्वत्रिराय च नमः शीघ्र।
नमः उर्म्याय चावस्वन्याय च नमो नादय च द्वीप्याय च ।।।

गो शिवजी को बिल्वपत्र दान का मंत्र…
दर्शन बिल्वपत्रस्य टचनं पापनासनम् ।
अघोरपासंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ।।।

जरुर पढ़ा होगा- गुरु पूर्णिमा 2021: कब आषाढ़ मास की तिथि समाप्त हो गई है, Pur मिलेगा

गुरु पूर्णिमा

गो शिव के 108 नाम…

1. शिव – कल्याण स्वरुप,
2. शंकर – सबका कल्याण पसंद करेंगे,
3. शम्भू – आनंदमय स्वरुप,
4. महेश्वर – माया के अधीश्वर,
5. पिनाकी – पाक धनु राशि वाले,
6. महाकाल – काफोड के भी काल,
7. कृपानिधि – करुणा की खान,
8. वामदेव – अत्यंत सुंदर स्वरुप,
9. विरूपाक्ष – चमत्कारी आँखे देखा,
10. कपार्दी – जटा काटने वाला,
11. नीललोहित – और लाल रंग
12. शूलपाणी – तालिका में त्रिशूल कॉर्टिंग,
13. विष्णुवल्लभ – विष्णु के अति प्रिय,
14. शिपिविष्ट – सितुहा में प्रवेश करें,
15. अंबिकानाथ-देवी भगवती के पति,
16. श्रीकण्ठ – सुंदर कण्ठ,
17. भक्तवत्सल – प्रिय को प्रिय स्नेही,
18. भव – संसार के रूप में होने वाले होने,
19. शर्व – अडचनों को परेशान करना,
20. त्रिलोकेश- लोकों के स्वामी,
21. शितिकण्ठ – वाइट करण्ठ,
22. शिवप्रिय – पार्वती के प्रिय,
23. देश-विदेशी
24. कपाली-कोरिंग इश्कबाज,
25. कामरी – कामदेव के शत्रु, अमोघ को हरने,
26. सुरसूदन – अन्धक दैत्य को मारवाड़,
27. गंगाधर – गंगा को जटाओं में उड़ने वाले,
28. ललाटा – मै पर आँख का ढलाई,
29. शशिशेखर – शादी की सोच,
30. खटवांगी-खोटिया का एक फ़लक,
31. भीम – भयावह या रुद्र रूपी,
32. परशुहस्त – तालिका में फरसा सह,
33. मृगपाणी – हिरन का मांस काटने वाली,
34. जटाधर – जटा हड़ताल,
35. कैलासरी आवास – निवास स्थान,
36. कोची – कोरिंग कोरिंग,
37. हार्डी – बेहद मजबूत देह,
38. एन्ट्किव्स – सुर का विनाशकारी,
39. वृषांक – बैल-चिह्न की ध्वजा,
40. वृषभ राशि वाले – बैल पर सवार होने वाला,
41. भस्मोद्धूलितविग्रह – भस्म फेर,
42. साम्प्रदायिकता-सामगान से प्रेम प्यार,
43. स्वरमय – सात स्वरों में रहने वाले,
44. त्रिमूर्ति – वेद रूपी विग्रह,
45. अनीश्वर – जो स्वयं ही अप्रिय है,
46. ​​सर्वज्ञ – सब कुछ अंश,
47. महात्म्य – सब ठीक हो गया,
48. सोमसूर्यग्निलोचन – चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी नेत्र,
49. हवि – आहुति रूपी द्रव्य,
50. यज्ञमय – यज्ञ स्वरुप,
51. सोम-उमा के रूप में अंकित,
52. पंचवक्त्र-पाचक मुख,
53. सदाशिव – नित्य कल्याण रूपी,
54. विश्वेश्वर- विश्व के ईश्वर,
55. वीरभद्र – और वीर शान्त स्वरुप,
56. गणनाथ – गणों के स्वामी,
57. प्रजापति – प्रजा का पालन-पोषण करने वाले,
58. हिरन्यरेता – सुनहरा तेज,
59. दुर्धुर्ष – किसी से न डरने वाले,
60. बैरीश – पर्वत के स्वामी,
61. गिरेश्वरी – कैलाश पर्वत पर,
62. अनघ – पाप कीटाणुरहित,
63. भुजंगविह्न – स्नापों व नागों के जेवर कॉर्टिंग,
64. भर्ग – पापों का नाश करने वाला,
65. गिरिधन्वा – मेरू पर्वत को धनुष,
66. गिरीप्रिय – पर्वत को प्रेम प्यार,
67. कृत्तिवासा – गुज़र्म का उपयोग करते हुए,
68. पुराराति – पुरों का नाश करने वाला,
69. सर्वसमर्थ ऐश्वर्य स्पीरिट, सर्वसमर्थ
70. प्रमथाधिप – प्रथमगणों के अधिपति,
७१. मृत्युंजय – मृत्यु को देखते हुए,
72. सूक्ष्मतनु – सूक्ष्म जीव,
73. संशोधित मौसम में जांच की गई स्थिति,
74. जगत् के गुरु,
75. विकमकेश – आकाश रूपी बाल वाले,
76. महासेनकारक – कार्तिकेय के पिता,
77. चारुविक्रम – सुन्दर परक्रम,
78. रूद्र – उग्र रूप में,
79. भूतपति – भूतप्रेत व पंचभूतों के स्वामी,
80. स्थूल कण – स्पंदन विहीन कूटस्थ रूप में,
८१. अहिर्बुध्न्या – कुंडलिनी-कोरिंग,
82. दिगंबर – अग्न, आकाश रूपी वस्त्र,
83. अष्टमूर्ति – आठ रूपी,
८४. बहुसंख्यक – अनेक आत्मा,
85. सात्त्विक- सत्वगुण वाले,
८६. शुद्धविग्रह – दिव्यमूर्ति स्नेही,
87. प्रकृति-निर्णय,
88. खांडपरशु – टूटा हुआ फरसा कॉर्टिंग,
८९. अ-जन्मजात विहीन,
90. पास विमोचन – काम सेने,
91. मृड – सुखस्वरूप वाले
92. पशुपति – के स्वामी,
93. देव – स्वयं प्रकाश रूप,
94. महादेव – देवों के देव,
95. अव्यय – खर्च होने पर घटने वाले,
96. हरि – विष्णु समरूपी,
97. पूषदन्तभित् – पूषा के दांतने,
98. अव्यग्र – व्यथित न होने वाले,
99. दक्षध्वरहर – दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाला,
100. हर – पापों को हरने,
१०१. भगनेत्रभिद – भग देवता की आंख फूटने,
102. अव्यक्त – इंद्रियों के रोग न होने वाले,
१०३. सहस्रक्ष – आंखों की रोशनी,
१०४. सहस्रपाद – अनंत पायरी,
१०५. अपवर्ग परिवार – मोक्ष नियत,
106.अनंत-देशी वस्तु रूपी परिच्छेद से विहीन,
107. तारक – तारने वाले,
108. – ईश्वर ईश्वर।








.

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *