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ये कैसी स्मार्ट सिटी: सिस्टम ऑनलाइन हाे रहा है ताे 58 कराेड़ से क्याें बन रही है इस काम के लिए बिल्डिंग, पैसे की बर्बाद करने की क्या जरूरत


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शिमला4 घंटे पहले

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सब्जी मंडी में इस तरह का प्री-फैब्रिकेटेड भवन बनेगा। - Dainik Bhaskar

सब्जी मंडी में इस तरह का प्री-फैब्रिकेटेड भवन बनेगा।

नगर निगम ने दावा किया था कि अब 200 से अधिक पेमेंट एप और बैंकों के जरिए अपना प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य बिल जमा करवा सकेंगे। इसके लिए नगर निगम शिमला ने भारत बिल पेमेंट सिस्टम प्लेटफार्म शुरू किया है। दावे किए गए गए कि ऐसा करने वाला शिमला नगर निगम प्रदेश का पहला एमसी है। इसके तहत लोग किसी भी बैंक के पेमेंट एप पर जाकर प्रॉपर्टी टैक्स जमा कर सकते हैं। जबकि अब एक छत के नीचे सुविधा देने की बातकर 58 कराेड़ की लागत से सब्जी मंडी में प्री-फैब्रिकेटेड भवन बनाया जा रहा है।

जबकि इस भवन की अभी जरूरत नहीं है। अभी शहरवासी नगर निगम की वेबसाइट पर जाकर डेबिट या क्रेडिट कार्ड से बिल भुगतान कर रहे हैं, ऐसे में स्मार्ट सिटी का पैसा क्याें इस भवन में लगाया जा रहा है। दरअसल, नगर निगम की ओर से स्मार्ट सिटी के तहत सब्जी मंडी के ग्राउंड में एक भवन बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस भवन में सभी तरह की सुविधाएं एक छत के नीचे दी जानी हैं। पानी के बिल से लेकर हाउस टैक्स, कूड़े और अन्य तरह के बिल यहीं जमा हाेंगे। अब हैरानी इस बात की है कि जब काम ऑनलाइन हाे रहा है ताे इसके लिए इतने पैसे बर्बाद करने की क्या जरूरत है।

पैसाें की बर्बादी के अलावा काेई प्लान नहीं: पूर्व मेयर
पूर्व मेयर संजय चाैहान का कहना है कि निगम के सभी कार्यालय पहले टाउनहाल में थे। टाउनहाल की मरम्मत के लिए खाली करने के बाद इसे शिफ्ट किया गया था। टाउनहाल के तैयार होने के बाद उच्च न्यायालय ने निगम को महापौर व उप महापौर के कार्यालय इसमें रखने की अनुमति दी। सभी तरह के बिल ऑनलाइन जमा हाे रहे हैं। अब नए भवन काे बनाने का काम समझ से परे हैं। पहले ऑनलाइन स्कीम लांच करने पर पैसा खर्च किया गया, अब इस भवन काे बनाने के लिए पैसे खर्च किए जाएंगें। जाे काम हाेने चाहिए, वे काम हाे नहीं रहे हैं।

नगर निगम का हाउस भी हाे चुका है ऑनलाइन
नगर निगम का हाउस तक ऑनलाइन हाे चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि ऐसी क्या जरूरत पड़ गई कि भवन काे बनाना पड़ रहा है। काेराेना संकट के समय निगम प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि बचत भवन में हाउस करवाकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं हो पाता है। शिमला शहर में 34 वार्डों के साथ नमित पार्षदों की संख्या 39 है। इसके अलावा इसमें अधिकारी और अन्य भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाना मुश्किल हो जाएगा, इसलिए हाउस ऑनलाइन हाेगा। जब हाउस ऑनलाइन हाे सकता है ताे अन्य सुविधाओं काे भी ऑनलाइन दिया जा सकता है।

नगर निगम का ये है दावा
नगर निगम प्रशासन का दावा है कि निगम की विभिन्न शाखाएं यहां-वहां हैं, ऐसे में लोगों को भटकना पड़ता है। सब्जी मंडी मैदान में खाली जगह पर भवन बनाया जाएगा। निगम के पास अपना कोई कार्यालय नहीं है। निगम का कार्यालय उपायुक्त कार्यालय के भवन में चल रहा है। ऐसे में बैठक करने तक की जगह निगम के पास नहीं है। मासिक बैठक के लिए भी निगम को बचत भवन में उपायुक्त कार्यालय से अनुमति लेनी पड़ती है। बचत भवन न मिलने पर शहरी विकास भवन में बैठक करनी पड़ती है। इसलिए ये भवन बनाया जा रहा है।

ये नगर निगम का ड्रीम प्राेजेक्ट हैं। सब्जी मंडी मैदान में निगम का 58 करोड़ की लागत से फैबरिकेटिड भवन बनेगा। इससे एक ही जगह पर सभी सुविधाएं मुहैया होगी। इस ड्रीम प्रोजेक्ट को जल्द अमलीजामा पहनाया जाएगा। इससे शहर के ही लाेगाें काे फायदा हाेगा। -सत्या काैंडल, मेयर नगर निगम शिमला

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