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सरकार छोटे बच्चों को स्कूल बुलाने की जल्दी में नहीं: विंटर क्लोजिंग स्कूलों में 15 फरवरी के बाद लगेंगी प्री नर्सरी-नर्सरी, एलकेजी की कक्षाएं


शिमला14 घंटे पहले

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हिमाचल के स्कूलों में प्री नर्सरी, नर्सरी, एलकेजी के बच्चों की कक्षाएं इस साल नहीं लगेगी। - Dainik Bhaskar

हिमाचल के स्कूलों में प्री नर्सरी, नर्सरी, एलकेजी के बच्चों की कक्षाएं इस साल नहीं लगेगी।

हिमाचल के स्कूलों में प्री नर्सरी, नर्सरी, एलकेजी के बच्चों की कक्षाएं इस साल नहीं लगेगी। कोरोना की स्थिति को देखते हुए सरकार अभी नर्सरी कक्षाओं के बच्चों को स्कूल नहीं बुलाना चाहती है। आंगनबाड़ी केंद्रों में भी नौनिहालों को अभी नहीं बुलाया जाएगा। दरअसल, सामाजिक बाल विकास की ओर से सरकार को पत्र लिखा गया था। उसमें आंगनबाड़ी में छोटे बच्चों को बुलाने के लिए सहमति मांगी गई थी। लेकिन सरकार ने अभी तक उस पर सहमति नहीं जताई है।

उधर सरकारी स्कूल में नर्सरी के छोटे बच्चों को भेजने के लिए अभिभावक भी तैयार नहीं हैं। दो साल से स्कूलों में नर्सरी के बच्चों की कक्षाएं नहीं लग रही हैं। सरकारी स्कूलों में इस समय 28 हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ अभिभावकों का कहना है कि दो साल से कोविड काल में इन छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई भी सही ढंग से नहीं हो पा रही है। इस वजह से नर्सरी के छात्रों के लर्निंग सिस्टम पर प्रभाव पड़ रहा है। फिलहाल इस मामले पर सरकार अभी स्वास्थ्य विभाग के सुझाव पर भी कोई निर्णय लेगा।

दरअसल स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि छोटे बच्चों में सोशल डिस्टेंसिंग रखना स्कूल में आसान नहीं होगा। इस वजह से अभी 3 से 5 साल तक के बच्चों को बुलाना सही नहीं है। उधर राज्य में संक्रमण दर भी जब शून्य हो जाएगी तो उसके बाद छोटे बच्चों पर सहमति जताई जाएगी। बता दे कि प्रारंभिक शिक्षा विभाग की सिफारिश पर सरकार केवल दो और तीन माह के लिए छोटे बच्चों पर रिस्क नहीं लेना चाह रही है।

विंटर क्लोजिंग स्कूलों में 15 फरवरी के बाद प्री नर्सरी, नर्सरी व एलकेजी के छात्रों को बुलाया जा सकता है। वहीं समर क्लोजिंग स्कूलों में एक अप्रेल से नए सत्र की कक्षाएं ही प्री नर्सरी छात्रों की होगी। उधर, दूसरी ओर पहली से 12वीं तक बच्चों का स्कूल आने की संख्या बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को 11वीं कक्षा के 60 फीसदी था। दसवीं कक्षा में के 51 फीसदी छात्र स्कूल पहुंचे था। छठी से आठवी कक्षा तक के बच्चाें का भी स्कूल आने का अच्छा रुझान देखने काे मिल रहा है। सोमवार से छात्रों की संख्या बढ़ सकता है।

दो साल से नर्सरी की पढ़ाई नाममात्र
बता दें कि दो साल से नर्सरी के छात्रों की पढ़ाई नाममात्र है। छोटे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना संभव नहीं है। ऐसे में शिक्षा विभाग की फीडबैक भी यही है कि छोटे बच्चों के लर्निंग सिस्टम को ठीक करना ऑनलाइन से संभव नहीं हो पा रहा है।

अभी स्कूलों में 70 फीसदी उपस्थिति
स्कूलों में पढ़ाई को लेकर व्यवस्था अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है। छोटी कक्षाओं से लेकर बड़ी कक्षाओं तक स्कूलों में बच्चों की हाजिरी 70 फीसदी के पास पहुंच गई है बीते कल 12वीं कक्षा में सबसे ज्यादा में सबसे ज्यादा 75 फीसदी बच्चें स्कूल पहुंचे।

अभी छोटे बच्चों को बुलाने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, वैसे ही छोटे बच्चों को स्कूल बुलाया जाएगा। पंकज ललित, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग।

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