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महेश नवमी: महेश नवमी कब और जानें महेश्वरी पैदाइशी पैदा हुई ये गुप्त

महेश नवमी: महेश नवमी कब और जानें महेश्वरी पैदाइशी पैदा हुई ये गुप्त


नवमी के दिन और शुभ शिव की पूजा का भी…

हिंदू समाज में गोशिव बहुत ही समय बीतने के लिए, हिमेश नवमी का भी, शुक्लपक्ष की तिथि को नियत तारीख तय की गई है। इस दिन भगवान शिव की विशेष देखभाल है। इस तरह इस वर्ष 2021 में यह पर्व, 19 नवंबर (ज्येष्ठेष्ठ के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि) या तिथि को नया होगा।

महेश नवमी 2021:
नवमी तिथि दिनांक: 18 जून 2021 को शाम 08:35 बजे से
नवमी तिथि पुष्टिकरण: 19 जून 2021 को शाम 06:45 बजे तक

सेकेल के दिन (ज्येष्ठा के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि) ही माहेश्वरी-समाज की पैदाइशी। इसलिए चयन से माहेश्वरी समाज यह भयानक ही धूम से मौसम है। नवमी के दिन और शुभ शिव की पूजा का भी व्यवस्था है।

गर्म होने के बाद, वे संक्रमण से प्रभावित होते हैं। हिमेश नवमी का पर्व भगवान शिव और पार्वती के पूर्ण दैवज्ञ और क्रियाएँ है।

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हिमेश नवमी: सभी समाचार पत्र से मुक्त
ईश्वरीय शुभंकर शुभ फलदायी है। मान्यता के अनुसार माहेश्वरी समाज के पूर्वजों को किसी कारण से ऋषियों ने श्राप दे दिया था। इसके बाद महादेव ने प्रश्न पत्र से मुक्त और अपना नाम भी दिया। यह भी शुष्क शंकर की आज्ञा से ही सामाजिक कार्य के लिए कार्य करता है।

भगवान विष्णु के पर्व पर भगवान इस त्योहार के अवसर पर भी खुश होते हैं। इस तरह की गतिविधियों की स्थिति में भी ऐसा ही होगा। यह पर्व गोकू शंकर और माता पार्वती के प्रति पूर्ण कार्य और कार्य.

संयुक्त राष्ट्र मास के शुक्ल वर्ष की नवमी को “महेश नवमी” का उत्सव है। वंश के वंशज माहेश्वरी समाज की वंशवंशी वंशी योधिष्ठिर संवत 9 के ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को वंश के वंशज थे, इसलिए वे माहेश्वरी समाज हर साल की ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को “महेश नवमी” के नाम से जानते थे। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव (त्रिपुरारी) और माता पार्वती जी की आराधन को समर्पित है।

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श्रवण के ईश्वरीय भगवान्…
प्राचीन कि, युधिष्ठिर संवत 9 जयेष्ठ शुक्ल नवमी के शुभ यानि शिव और आदि शक्ति यानि माता पार्वती ने ऋषियों के शाप के रूप में बने 72 क्षत्रिय उर्मों को शाप से मुक्त और पुन: जीवन कहा, ‘आज से म्यूटेशन पर (धर्मपर) वसीयत, अत: आप “माेश्वरी” कहलाओगे’।

इस प्रकार के ईश्वरीय और माता पार्वती की कृपा से पुन: उत्पन्न होने और माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति के कारण उत्पन्न होते हैं, इसलिए वे जानते हैं और माहेश्वरी समाज के सामान्य पार्वती परिवार के उत्सव ‘माहेश्वरी वंश की उत्पत्ति’ में होते हैं। बड़ी धूम-धाम से कार्यक्रम। इस छुट्टी के समय यह भी चल रहा है।

मौसम के जानकारों का है कि कोरोना संक्रमण के एक साल के लिए मौसम को मौसम में परिवर्तन आ रहा है। इस तरह से बार में भी इसी तरह से (यानि कोरोना का सफ़ाया) ऐसा करने के लिए उपयुक्त होंगे। भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।

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