Gaslighting: जानें क्‍या है गैसलाइटिंग, कैसे बच सकती हैं इसके असर से महिलाएं

Gaslighting: जानें क्‍या है गैसलाइटिंग, कैसे बच सकती हैं इसके असर से महिलाएं


अक्सर किसी ने आपको दफ्तर, घर या किसी और जगह में इस तरह की बातें कहीं हैं कि आपको चीजें कभी भी ढंग से याद नहीं रहतीं. आप को पूरा विश्वास है कि आपकी याददाश्त सही काम कर रही है. आप क्या कह रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा है आप मुझे कंफ्यूज कर रहे हैं या फिर ये कहा कि आप बातें बना रहे हैं. तो आप गैसलाइटिंग(Gaslighting ) का शिकार हो रहे हैं. यह एक ऐसी स्थिति है जो धीरे-धीरे बढ़ती जाती है और आपको ये पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि आप इसका शिकार हो चुके हैं. जब-तक पता लगता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और ये आपको नुकसान पहुंचा चुकी होती हैं तो आज हम इसी टर्म के बारे में आपको यहां बताने जा रहे हैं.

कहां से आया गैसलाइटिंग शब्दः  

पैट्रिक हैमिल्टन के 1938 के स्टेज प्ले ‘गैस लाइट’ के बाद इसी पर बनी फिल्मों के 1940 -1944 से गैसलाइटिंग शब्द आया. इस प्ले में एक एब्यूजिव पति अपने घर की गैस लाइट की रोशनी कम देता है और पत्नी को मैन्युप्लेट कर यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि उसे रोशनी को लेकर भ्रम हो गया है. हालांकि 1960 में “गैसलाइटिंग” बोलचाल की भाषा इस्तेमाल होने लगा. इसका मतलब किसी व्यक्ति के वास्तविक दृष्टिकोण में हेरफेर के जरिए बदलाव लाने से लगाया गया.

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क्या है गैस लाइटिंगः  

गैसलाइटिंग दुर्व्यवहार का एक रूप है जिसमें एक व्यक्ति या कह लें ग्रुप जानबूझकर किसी व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक तिकड़म के जरिए उसके विवेक या समझदारी पर संदेह करने पर मजबूर कर देता है. अक्सर यह धीरे-धीरे विकसित होती है, जिससे व्यक्ति को ये पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि वह वास्तव में इसका शिकार बन रहा है. गैसलाइटिंग के शिकार व्यक्ति को खुद की काबिलियत को लेकर ही भ्रम होने लगता है, उसे लगता है कि वह कुछ नहीं कर सकता वो पॉवरलेस है.वह खुद की ही मेमोरी, फिलिंग और सेंसेज पर भरोसा नहीं कर पाता. वह सच में मानने लगता है कि वो मानसिक रूप से ठीक नहीं हैं, कि उसकी याददाश्त सटीक नहीं हैं, या यह कि उसका दिमाग उसके साथ चालें चल रहा है. इसका बुरा असर उसकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी पड़ता है.गैसलाइटिंग के लंबे वक्त तक रहने वाले बुरे प्रभावों में ट्रॉमा, एंग्जाइटी और डिप्रेशन हैं. इस वजह वो उस गलत व्यक्ति पर निर्भरता महसूस करने लगते हैं जो उनकी इस हालत के लिए जिम्मेदार हैं.

क्यों होती हैंः   

नेशनल डोमेस्टिक वॉयलेंस हॉटलाइन के मुताबिक, गैसलाइटिंग इसलिए होती हैं क्योंकि कोई व्यक्ति किसी और पर नियंत्रण हासिल करना चाहता है. यह एक ऐसा व्यवहार है जिसे कोई दूसरों को देखकर सीखता है. एक एब्यूजिव व्यक्ति को लग सकता है कि वे अन्य लोगों को नियंत्रित करने के हकदार हैं, या यह कि उसकी भावनाएं या राय सबसे ज्यादा मायने रखती हैं.

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गैस लाइटिंग में जेंडर का रोलः  

दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर केट अब्रामसन के मुताबिक, गैसलाइटिंग किसी खास लैंगिगवाद (Sexist) से बंधी हुई नहीं है. अगर हम यह कहें कि यह किसी खास लिंग (Gender) के लिए ही होती है तो ऐसा नहीं है.हालांकि अक्सर महिलाएं पुरुषों की तुलना में इसका अधिक सामना करती हैं और यह हमारी सोशल कंडीशनिंग का नतीजा है. वह कहते हैं कि यह सेक्सिज्म की संरचना का एक हिस्सा है, जिसे महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम आंका जाता है. महिलाओं के आत्मविश्वास को शक की नजर से देखा जाता है और किसी के आत्मविश्वास को डिगाना ही गैसलाइटिंग का उद्देश्य होता है और इसकी फाइनल स्टेज बेहद खतरनाक, क्लीनिकल डिप्रेशन वाली होती है. हालांकि किसी को भी गैसलाइटिंग का अनुभव हो सकता है और यह किसी भी तरह के संबंधों में हो सकती है, लेकिन यह अंतरंग संबंधों में और सामाजिक संबंधों में विशेष रूप से आम है जहां शक्ति का असंतुलन है.

गैसलाइटिंग की तकनीकः 

नेशनल डोमेस्टिक वॉयलेंस हॉटलाइन के मुतबिक किसी व्यक्ति को किसी को गैसलाइट करने के लिए कई तकनीकों इस्तेमाल में लाई जाती हैं. जैसे काउंटरिंग, विदहोल्डिंग, डिनायल आदि. इनमें से ही एक है स्टीरियोटाइपिंग. अमेरिकन सोशियोलॉजिकल रिव्यू के एक लेख में कहा गया है कि गैसलाइटिंग तकनीकों का उपयोग करने वाला व्यक्ति जानबूझकर किसी व्यक्ति के लिंग, जाति, नस्ल, कामुकता, राष्ट्रीयता या उम्र के नकारात्मक स्टीरियोटाइप का उपयोग कर सकता है. उदाहरण के लिए, वे एक महिला को कह सकते हैं कि यदि वह खुद के साथ हो रहे खराब बर्ताव के लिए मदद मांगती है. तो लोग सोचेंगे कि वह बेकार की बात कर रही है या पागल है.

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कैसे करें सामना और कब लें मददः  गैसलाइटिंग का शिकार है तो इससे बचने के लिए एक डायरी में अपने साथ हुआ सब नोट करें. किसी विश्वासपात्र या काउंसलर को इस बारे में बताएं. हमेशा फोटो लेकर रखें ताकि आप सबूत पेश कर सकें कि आप सही कह रहे हैं. वॉयस मेमोज रखें और उस पर अपने और एब्यूजिव पार्टनर की सारी बातें रिकॉर्ड करें. अपने लिए सेफ्टी प्लान तैयार रखें. सारे सबूत किसी सीक्रेट जगह रखें या आप इन्हें अपने किसी भरोसे के आदमी को भेज कर इन्हें खत्म भी कर सकते हैं.अपना फोन लॉक कर के रखें.जब गैसलाइटिंग शारीरिक हिंसा में बदल जाए तो तुरंत मदद लें. इसके लिए डोमेस्टिक एब्यूज ऑर्गेनाइजेशंस से संपर्क किया जा सकता है. गैसलाइटिंग से मेंटल हेल्थ प्रभावित होने पर अनुभवी डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए.

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