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छत्तीसगढ़ी विशेष – नेम धरम सबवे बने हे तभे बरव होवत हे

छत्तीसगढ़ी विशेष – नेम धरम सबवे बने हे तभे बरव होवत हे


जगत नियंता निरमान काल के ले के आज तक ले नई राहे हे। जीओ जीव अपन-अप करन डाइन अजीता वायुयान चलने आवत आवत सेती दुनिया में चलने वाले वायुत आवत हेउ वायुयान घलोक उत्ती, बुड़ती, रक्सहूं, भरत अगास-पाताल ए डोसो सा मा जेकरा चलने योग्य तेने तेने नियं। पूरो-पुरो के सबो दहर अपन मया ला बांटने वाला कभू सुतय न तई लागट। मन भित्ती का प्रवाह हेट हे तेला काहत होबे ते काहत रा सबो, धरे हावय बनाए गए हैं। पीपर कसना डोलत जी ला अप जेमिंग मान मति चेंजी। मोरेच मोर, तो मोरेचर कहइया सुनय्या कत्का झन ही तोर अंगरी में तो जाहीं। अब गणती तोर मा हावय तफेर काबर उदास-बादी होवत हे, सोचे के बात हरय। रद्दा अउ बेरा-बेरा चतवारत रा. चवार के रेहे में-खुटी के डर नय रें सुख अउ दुख के एही हरिय़ारी. सुख हावय ते दुख घलो होवित अगीजले। ले जानबा नाइ होवय अ आक्रमण के विश्व भर के आक्रमण हमेब्वेर मा पर हे हे, अयह नोहय येला अंधारी, अंजोरी पाखंकेके बना अटैक चेताए धरे।

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का हो अही कहके कहु कोनो सोचबेच करत तेला तें नइ जानस न में नयनव म हमगणित हावय.गणती के दिन हावय तभो ले रई अगीसियन मन घलोथ कथ। कटका सुघ्््‌्‌सी के जानलेवा हावय एला अहम हे। सब हावने के सियान मनखे अपन-अपन से बुटा तियारे बबर नेम धर्म ला साईको के रोहे के उदीम करिथें रईथें सेती हम गीत-जागत। जीनी के सरअतकेच मा हावय के सबो जीस के उपार्जने वाला अक्कल घलो हे भागे हवय मनखे के पहिली अब्बड़ सोच होहिं त ये घलो लोग काबर के घड़ी की गणना ला घोलो धरेले रेहड़ना एमटी।

जीव जगत लॉगिंग डारबे कहूं भुंइया मा, कहूं पानी मा त कहूं अगास में निहार की खोज सब अपने च मा नय रेने एक दूसर ले सेती बनाए गए ढांचे के सेती हरय.
करुक्सा घलो हे ते मीठ-मीठ लाँघलत रेहंव कहिबे ते बात नइ बनय.सवाद लएया कत्का अखन सेवाद ला जाना डारही तेला सब जान डारथें.पहली अउ अब मा कटको फरक परगे ये कहिए घलो मिल ही. रा,तिया राहे रेइबे ते दुख पीरा जादा नयज्याय। पारा परोसी, लरा-जरा, भाई भतीज मण दुख पीरा मा अगुवा के तोला धरे बर काब कहिथ काबर के ए सब विश्व में होथच आज सुख हे के दुख हे तोला सोलेच मा रेकी जनाही। एयर अउ जनवानो सब धर्म-करम मॅह महत्व हावय.सबो धरम बने हे, बने रहने वाले एक झन हावय लो ला धयान धरे रथ, कोन, कोन डहर ओला पता हे।

एदेलोच की बात हरय अगे केहे मा कत्का सुघ्घर लगत। बने मिझे संस्कार हावय। अपन घड़ी में बैठी रेबे ते ठाढ़ेच रे जाबे। एकगू रेहे मा नइ बनय। अदृष्य स्थिति जैसी चाही।सब स्थिति बदली हुई हालत में चाही हालत को हाल ही में बदली हुई स्थिति में बदली हुई स्थिति में रहने वाले लोगों के लिए असामान्य स्थिति पैदा हुई थी। विश्व बनाने वाला बनाने वाला तोर लीलाअपार हे.

एक चौरा सब धर्म के मनखेर सकलाके बिचार कर रिहिन अयूच राहंय कटकामत हावय नाउउ सो हमे हांत-बात हे। अल्को खब दब दब दब दैट एला सबो झन अनबो करेंथ जनफेर रोसे के सब धरण आही ले का ही झंन होवय एला सदा सुरता मा रना स्टेट हे काबर सबरो सबरो विभाग के वासवास क्यूं संसारी सुखी सुमरण जेगी मे निस्तार करत रिहीं काबर के लेना घलो लागे रईथ।

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